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38- झंझारपुर विधानसभा सीट पर नए समीकरणों से लिखी जाएगी जीत-हार की पटकथा ! क्या महागठबंधन का कारनामा दोहरा पाएगी सीपीआई ? या फिर से ये सीट एक बार फिर नितीश मिश्रा के पिता-पुत्र सत्ता का केंद्र बन कर रह जाएगी !!

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क्या महागठबंधन का कारनामा दोहरा पाएगी सीपीआई ?   यहाँ यह देखना दिलचस्प होगा कि पिछली बार जिस समीकरण और गठबंधन के आधार पर राजद ने झंझारपुर में भाजपा को पटखनी दी थी, क्या दोबारा वैसा ही कारनामा सीपीआई दोहरा पाएगी? या फिर से ये सीट एक बार फिर नितीश मिश्रा के पिता-पुत्र सत्ता का केंद्र बन कर रह जाएगी ? या नए दल  राष्ट्रीय लोक समता पार्टी  के साथ फिर पूर्व भाजपा सांसद  विरेंद्र कुमार चौधरी जीत हासिल क्र पाएंगे ?   आज के रिपोर्ट में जानेंगे क्या है झंझारपुर विधानसभा सीट का समीकरण एवं जानेंगे इतिहास वर्तमान और भविष्य को  मधुबनी जिले में कभी कांग्रेस का गढ़ रहे झंझारपुर पर इस बार सबकी निगाहें टिकी हैं। यह सीट कई मायने में खास है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जगन्नाथ मिश्रा इसी सीट से विजयी होते थे। बाद में उनके पुत्र नीतीश मिश्रा भी तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किये। पिछले चुनाव में यह सीट महागठबंधन की झोली में गई और राजद के गुलाब यादव ने विजय पताका लहराया। अब बदले राजनीतिक हालात में यहां फिर नये समीकरणों से जीत-हार की राजनीतिक पटकथा लिखी जाएगी।  बिहार के झंझारपुर विधानसभा सीट  में पर

2009 में राजधनी एक्सप्रेस पकड़ते- पकड़ते गुप्तेश्वर पांडेय जी 2020 में पटना-बक्सर लोकल भी नहीं पकड़ सकें

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बक्सर का बेटा, बिहार का सिपाही, जैसे दावा के बीच बिहार के पूर्व डीजीपी पांडेय जी का टिकट कट गया। नहीं लड़ पाएंगे इस बार चुनाव । आज के इस ब्लॉग में बताएंगे टिकट नहीं मिलने के कारण। अगर आपको हमारा ब्लॉग पसंद आ रहा हो तो अपना अनुभव कमेंट कर के बताएं साथ में सब्सक्राइब करना नहीं भूले।   हमें अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था। मेरी किश्ती  वहां डूबी जहाँ पानी कम था। यह शायरी कहावत आपने तो सुना ही होगा। आज कल ये कहावत चुनावी सरगर्मी में बिहार के  लोगों के जुबान पर हैं। हो भी क्यों न ? बात ही कुछ ऐसी हैं। आप तो समझ गए होंगे हम किस व्यक्तित्व के बारे में बात कर रहे है । जी हाँ हम बात कर रहें हाल ही में पुलिस महानिदेशक के पद से वीआरएस लेकर जदयू में शामिल हुए नेता गुप्तेश्वर पांडेय जी का।  2009 में गुप्तेश्वर पांडे आखिरी क्षण में राजधानी एक्सप्रेस नहीं पकड़ पाये थे और 2020 में बक्सर-पटना स्पेशल भी छूट गयी है। बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय अपने इंटरव्यू मे, मीडिया से बातचीत के क्रम में  बोलते रहते हैं कि  मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है, लेकिन उनके बिना टिकट के जदयू से  राजनीतिक सफर

40-लौकहा विधानसभा सीट से कौन बचा पायेगा अपना दुर्ग? महागठबंधन के राजद या एनडीए के जेडीयू ?

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लौकहा विधानसभा सीट से लक्ष्मेश्वर रॉय वर्तमान में विधायक हैं। नीतीश सरकार में हैं आपदा प्रबंधन मंत्री भी हैं।  2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के लक्ष्मेश्वर रॉय ने बीजेपी के उम्मीदवार प्रमोद कुमार प्रियदर्शी को चुनाव में मात दी थीं। जेडीयू का दुर्ग बनती जा रही है लौकहा सीट। बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक लौकहा विधानसभा का सीट क्रमांक 40 है। लौकहा विधानसभा मधुबनी जिले और झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के दिग्गज नेता और आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय विधायक हैं। यह सीट एनडीए गठबंधन के लिए बेहद अहम है। लौकहा विधानसभा में कुल 2,85,441 वोटर्स हैं। जिसमें से 1,47,732 पुरुष और 1,73,705 महिला वोटर हैं। मधुबनी जिले में कुल 10 विधानसभाएं आती हैं। विधानसभाओं के नाम हैं हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर, झंझारपुर, फुलपरास और लौकहा। 2015 का चुनाव  2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल युनाइटेड के लक्ष्मेश्वर राय ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रमोद कुमार प्रियदर्शी को चुनावी समर में मात दी थी। 79